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230 फीट की ऊंचाई पर 72 घंटे की जंग… आखिरकार जीत गई जिंदगी! पांढुर्णा के BSNL टावर से सुरक्षित उतरे पश्चिम बंगाल के बुजुर्ग, प्रशासन, नगर पालिका, पुलिस और रेस्क्यू टीम के धैर्य ने बचाई जान

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230 फीट की ऊंचाई पर 72 घंटे की जंग… आखिरकार जीत गई जिंदगी!

पांढुर्णा के BSNL टावर से सुरक्षित उतरे पश्चिम बंगाल के बुजुर्ग, प्रशासन, नगर पालिका, पुलिस और रेस्क्यू टीम के धैर्य ने बचाई जान

पांढुर्णा | 09 जुलाई 2026

तीन दिन और तीन रात तक 230 फीट ऊंचे बीएसएनएल टावर पर बैठे एक बुजुर्ग को आखिरकार बुधवार शाम सुरक्षित नीचे उतार लिया गया। यह रेस्क्यू अभियान पांढुर्णा के इतिहास के सबसे चुनौतीपूर्ण अभियानों में शामिल रहा।

बुजुर्ग की पहचान अम्बुज दिगार (71 वर्ष) निवासी पश्चिम मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल के रूप में हुई। परिजनों के अनुसार वह मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं और इलाज चल रहा है। बेटी को नागपुर छोड़ने के बाद वह रास्ता भटककर पांढुर्णा पहुंच गए और भय के कारण बीएसएनएल टावर पर चढ़ गए।IMG 20260709 WA0000 2

रेस्क्यू अभियान के दौरान प्रशासन ने पूरी सतर्कता बरती। टावर के नीचे सुरक्षा जाल, गद्दे और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं। स्थानीय स्तर पर लगातार समझाइश दी गई, लेकिन भाषा की समस्या के कारण बुजुर्ग किसी की बात नहीं समझ पाए।FB IMG 1783541209790 2

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भोपाल और नागपुर से प्रशिक्षित फायर एवं रेस्क्यू विशेषज्ञों को बुलाया गया। विशेषज्ञों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बुजुर्ग तक पहुंच बनाई और सुरक्षा बेल्ट व रस्सियों की सहायता से उन्हें सुरक्षित नीचे उतार लिया।

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प्रशासन और नगर पालिका का सराहनीय योगदानFB IMG 1783541232671 2

इस पूरे अभियान में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगर पालिका, स्वास्थ्य विभाग, विद्युत विभाग, राजस्व विभाग, फायर एंड रेस्क्यू टीम तथा स्थानीय नागरिकों ने लगातार समन्वय बनाकर कार्य किया। तीन दिनों तक सभी विभाग मौके पर डटे रहे और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं होने दी।

जमीन पर उतरते ही कही भावुक बात

72 घंटे तक बिना भोजन और पानी के रहने के बाद जब अम्बुज दिगार सुरक्षित नीचे आए तो उन्होंने सबसे पहले कहा—

“मुझे मछली-चावल खिला दो और 150 रुपये दे दो, मुझे अपने गांव जाना है।”

उनकी यह बात सुनकर मौके पर मौजूद अधिकारी, कर्मचारी और नागरिक भावुक हो उठे।

भविष्य के लिए सबक

यह घटना बताती है कि सार्वजनिक स्थानों पर बने ऊंचे टावरों की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की जानी चाहिए। टावरों के बेस पर एंटी-क्लाइंबिंग जाली, मजबूत फेंसिंग और अन्य सुरक्षा उपाय अनिवार्य किए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

सच की ताकत – जनता के साथ

जिला रिपोर्टर : जितेश ठाकरे

जिला : पांढुर्णा, मध्यप्रदेश

मो. 9977458225

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